WHAT IS AYURVEDA – A BRIEF INTRODUCTION TO AYURVEDA

आयुर्वेद क्या है? – What is Ayurveda

A BRIEF INTRODUCTION TO AYURVEDA

आयुर्वेद हमारे ऋषि मुनियों द्वारा दिया गया अनमोल उपहार है जिसकी उपयोगिता का वर्णन शब्दों द्वारा नहीं किया जा सकता. आयुर्वेद दुनिया की सबसे पुरानी प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति हैं जिसका जिक्र वेदों में भी किया गया हैं। यह अथर्ववेद का विस्तार है।

यह विज्ञान, कला और दर्शन का मिश्रण है।पुराने ग्रन्थों और पाठो में इसकी उत्पति और प्राचीनता का वर्णन किया गया है। इसके अनुसार आयुर्वेद ने पौधों और मानव की उत्पति के साथ ही जन्म लिया हैं।आज भी यह सर्वश्रेष्ठ है. विदेशी वैज्ञानिक आयुर्वेद के सिद्धांतों का अध्ययन करके आश्चर्यचकित हो जाते है ।

‘आयुर्वेद’ नाम का अर्थ है, ‘जीवन का ज्ञान’ और यही संक्षेप में आयुर्वेद का सार है। यह चिकित्सा प्रणाली केवल रोगोपचार के नुस्खे ही उपलब्ध नहीं कराती, बल्कि रोगों की रोकथाम के उपायों के विषय में भी विस्तार से चर्चा करती है।

“आयुर्वेद ” शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – “आयुष” और “वेद” जिसका अर्थ है “जीवन विज्ञान’ – “Science of Life”‘

आयुर्वेद (Ayurved) केवल रोगों की चिकित्सा तक ही सिमित नहीं है अपितु यह जीवन मूल्यों, स्वास्थ्य एंव जीवन जीने का सम्पूर्ण ज्ञान प्रदान करता है.

हिताहितं सुखं दुःखमायुस्तस्य हिताहितम्।

मानं च तच्च यत्रोक्तमायुर्वेदः स उच्यते॥ -(चरक संहिता १/४०)

(अर्थात जिस ग्रंथ में – हित आयु (जीवन के अनुकूल), अहित आयु (जीवन के प्रतिकूल), सुख आयु (स्वस्थ जीवन), एवं दुःख आयु (रोग अवस्था) – इनका वर्णन हो उसे आयुर्वेद कहते हैं।

शरीर, इन्द्रिय, मन और आत्मा के मेल को ‘आयु’ कहते हैं। सामान्य शब्दों में कहने का मतलब है कि जब तक मनुष्य के शरीर में इंद्रियां काम करती रहती हैं,  मन कार्यरत रहता है और आत्मा प्राणों को बचाये रखती है तब तक मनुष्य जीता है।

आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में मृत्यु को छोड़कर सभी प्रकार के रोगों की चिकित्सा संभव है। यदि कहीं किसी रोग में असफलता मिलती है तो वैद्य या चिकित्सक में कोई कमी है जो चिकित्सा कर रहे हैं। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति अपने आपमें पूर्ण है।

आयुर्वेद भारतीय आयुर्विज्ञान है। आयुर्विज्ञान, विज्ञान की वह शाखा है जिसका संबंध मानव शरीर को निरोग रखने, रोग हो जाने पर रोग से मुक्त करने अथवा उसका शमन करने तथा आयु बढ़ाने से है।

आयुर्वेद की परिभाषा एवं व्याख्या

आयुर्वेद विश्व में विद्यमान वह साहित्य है, जिसके अध्ययन पश्चात हम अपने ही जीवन शैली का विश्लेषण कर सकते है।

 आयुर्वेदयति बोधयति इति आयुर्वेदः।

अर्थात जो शास्त्र (विज्ञान) आयु (जीवन) का ज्ञान कराता है उसे आयुर्वेद कहते हैं।

 स्वस्थ व्यक्ति एवं आतुर (रोगी) के लिए उत्तम मार्ग बताने वाला विज्ञान को आयुर्वेद कहते हैं।

जिस शास्त्र में आयु शाखा (उम्र का विभाजन), आयु विद्या, आयु सूत्र, आयु ज्ञान, आयु लक्षण (प्राण होने के चिन्ह), आयु तंत्र (शारीरिक रचना शारीरिक क्रियाएं) – इन सम्पूर्ण विषयों की जानकारी मिलती है वह आयुर्वेद है।

आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति जड़ी-बूटियों और वनौषधियों पर आधारित है। प्राचीनकाल में ऋषि-महार्षियों ने अनेक वर्षों तक गहरे जंगलों,  पर्वतों पर रहकर वहां की वनौषधियों पर वर्षों तक परीक्षण करके आयुर्वेद चिकित्सा का निर्माण किया तथा विभिन्न रोगों की उत्पत्ति और उनके निवारण के लिए विभिन्न प्रकार की औषधियों की गुणवत्ता का परीक्षण करने के बाद जनसाधारण को इसकी जानकारी प्रदान की।

आयुर्वेद की दो धाराएं हैं। कार्य चिकित्सा और शल्य चिकित्सा। प्रथम सम्प्रदाय कार्य चिकित्सा आत्रेय के नाम से और दूसरा धान्वन्तरि के नाम से प्रसिद्ध है। प्रत्येक सम्प्रदाय के आचार्यों ने अनेक ग्रन्थों की रचना की। आज उपलब्ध ग्रंथों में चरकसंहिता आत्रेय सम्प्रदाय (स्कूल ऑफ फिजिशियन)  का और सुश्रुत संहिता धान्वन्तर सम्प्रदाय (स्कूल ऑफ सर्जन)  का प्रधान ग्रंथ है।

आयुर्वेद और आयुर्विज्ञान दोनों ही चिकित्साशास्त्र हैं, परंतु व्यवहार में चिकित्साशास्त्र के प्राचीन भारतीय ढंग को आयुर्वेद कहते हैं और ऐलोपैथिक प्रणाली (जनता की भाषा में “डाक्टरी’) को आयुर्विज्ञान का नाम दिया जाता है।

 

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