शराब छोड़ने का सरल उपाय

किसी मादक पदार्थ (प्राकृतिक अथवा कृत्रिम) का नियतकालीन एवं दीर्घस्थायी सेवन जो कि किसी व्यक्ति विशेष अथवा समाज के लिए घातक हो, अवरोधक हो, उसे ही नशाखोरी कहना समीचीन है। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन की 1957 में प्रकाशित रिपोर्ट में पारिभाषित किया गया है।

इसके मुख्य लक्षण हैं – (1) मादक पदार्थ को लेने की प्रबल इच्छा और इसे प्राप्त करने के लिए कोई भी तरीका अपनाना, (2) मादक पदार्थ की मात्रा बढ़ाते जाना, (3) मानसिक एवं शारीरिक अधीनता।

इन मादक पदार्थों को हम मुख्यत: निम्न प्रकारों में बांट सकते हैं:

नारकोटिक्स : बेहोश करने वाली निद्राकारी औषधि -जैसे अफीम, हेरोइन आदि।
डिप्रैसेन्ट्स : चंचल कराने वाली औषधि-जैसे मदिरा।
स्टीमुलेन्ट्स : उत्तेजक-प्रोत्साहक औषधि-जैसे कोकीन।
हाल्युसिनोजेन्स : मतिभ्रम, इन्द्रजाल पैदा करने वाली औषधि-जैसे धतूरा आदि।
कैनाबिस : कल्पना लोक में पहुंचाने वाली औषधियां-जैसे चरस, गांजा आदि।

किसी भी नशे के रोगी का इलाज प्रारम्भ करने से पूर्व निम्न बातों पर ध्यान देना आवश्यक है -शराब, सिगरेट अथवा मादक पदार्थ के सेवन की आदत यदि रोगी के पिता अथवा परिवार के किसी सदस्य में रही हो, जिसकी वजह से रोगी को स्वयं से ही उनकी देखा-देखी नशा करने की आदत पड़ गई हो, पारिवारिक परिस्थितियां जैसे तनाव, व्यवसाय से असंतुष्ट, अशिक्षा अथवा प्रेम, जलन आदि की वजह से नशे की लत का शिकार हुआ हो। बुरे लोगों की संगति में रहना, घर-परिवार-समाज से बिलकुल कट जाने की भावना भी व्यक्ति को नशे के शिकंजे में कस सकती है।

नशा करने का कारण

बेरोजगारी, रोजगारपरक व चरित्र निर्माण करने वाली शिक्षा की कमी, अधिक जेब खर्च मिलना, कुछ नया करने की इक्छा, अकेलापन, आर्थिक तंगी, घरेलु कलह, गलत संगति, जागरुकता का अभाव आदि।

चिकित्सा का प्रारूप

नशे के रोगियों का इलाज करने के लिए बहुआयामी प्रारूप की आवश्यकता होती है। इसमें मानसिक,शारीरिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक पहलुओं पर गौर किया जाता है। प्रथम भाग में, मरीज की दवाओं द्वारा, व्याख्यानों द्वारा, शिक्षाप्रद सामग्री द्वारा एवं वार्तालाप द्वारा नशे की लत छुड़ाने का प्रयास करते हैं। दूसरे भाग में, मरीज की पूर्वस्थिति में (रोग से मुक्त की अवस्था) पहुंचाने की प्रक्रिया प्रारम्भ होती है। इस अवस्था में रोगी डाक्टर, नर्स इत्यादि के साथ दैनिक प्रक्रियाएं प्रारम्भ करता है।

रोगी को मादक पदार्थ प्राप्त नहीं होने से भूख लगती है, हर वक्त सोता रहता है, पसीना बहुत आता है, हाथ-पैरों में ऐंठन होने लगती है और मरीज उदास हो जाता है। कमजोरी, चिड़चिड़ाहट, बेचैनी, ऐंठन एवं मतिभ्रम पहले कुछ दिन महसूस होता है। मरीज ‘खूंखार’ व्यवहार कर सकता है।

जम्हाई आना, नाक से पानी बहना, पसीना आना, आंखों से पानी आना, नींद न आना प्रमुख लक्षण हैं। पुतली का फैल जाना, ऐंठन (मांसपेशियों की) अन्य लक्षण हैं। मरीज पीठ और पेट में दर्द की शिकायत करता है और सर्दी-गर्मी के झटके महसूस होते हैं। कुछ समय के लिए बेचैनी, उल्टी-दस्त आदि के लक्षण भी मिलते हैं। शरीर का तापमान, सांस एवं पसीना बढ़ जाते हैं, किंतु 7-10 दिन के अन्दर सभी लक्षण धीरे-धीरे दूर हो जाते हैं। नींद न आना, बेचैनी, कमजोरी कुछ समय बनी रह सकती है।

शराब पीना और विशेषरूप से धूम्रपान के साथ शराब पीना बहुत ही खतरनाक है | इससे अनेकों रोग जैसे कैंसर (मुह का ), महिलाओं में स्तन कैंसर, आदि रोग होते है | ऐसे बुरे व्यसन (आदत) एक मानसिक बीमारी है और इसे को छुडाने के लिए मानसिक बीमारी जैसे इलाज की आवश्यकता होती है |
वात होने पर लोग चिंता और घबराहट को दबाने के लिए धूम्रपान का सहारा लेते है | पित्त बढने से शरीर के अन्दर गर्मी लेने की इच्छा होती है और धूम्रपान की इच्छा होती है |
कफ बढने से शरीर के अन्दर डाली गयी तम्बाकू की शक्ति बढती है |
लेकिन आप इसका इलाज आयुर्वेद के माध्यम से कर सकते है और इसे बनाने के लिए 18-20 जड़ी – बूटियों का प्रयोग किया जाता है | सभी औषधियों को निश्चित मात्रा में मिलाकर यह दवा तैयार की जाती है | इस दवा का कोई बुरा प्रभाव नहीं है यदि इसे शरीर के वजन और स्वास्थ्य अनुसार दवा की मात्रा तयकर लिया जाता है | इस दवा का प्रयोग किसी का शराब का नशा छुड़ाने, धूम्रपान का नशा छुड़ाने, और अन्य का नशा छुड़ाने (जैसे गुटका, तम्बाकू) में प्रयोग किया जा सकता है |

जड़ी – बूटियों का विवरण और मात्रा निम्न है :-

गुलबनफशा- 2 ग्राम
निशोध – 4 ग्राम
विदारीकन्द (कुटज) – 15 ग्राम
गिलोय – 4 ग्राम
नागेसर – 3 ग्राम
कुटकी – 2 ग्राम
कालमेघ – 1 ग्राम
भ्रिगराज – 6 ग्राम
कसनी – 6 ग्राम
ब्राम्ही – 6 ग्राम
भुईआमला – 4 ग्राम
आमला – 11 ग्राम
काली हरर – 11 ग्राम
लौंग –    1 ग्राम
अर्जुन – 6 ग्राम
नीम – 7 ग्राम
पुनर्नवा – 11 ग्राम
मेश्श्रीन्गी

कैसे प्रयोग करे :-

उपर दी गयी सभी जड़ी – बूटियों को कूट और पीसकर पाऊडर बना लें । एक चम्मच दवा पाऊडर को एक दिन में दो बार खाना खाने के बाद पानी के साथ ले | इस दवा को खाने में मिलाकर भी दिया जा सकता है | जैसे – जैसे नशे की लत कम होने लगे इस दवा की मात्रा धीरे – धीरे कम कर दे | इस दवा का असर फ़ौरन पता चलने लगता है और लगभग दो माह में पूरी तरह से नशे की लत खत्म हो जाती है लेकिन दवा को कम मात्रा में और 2-3 दिन के अंतर के लगभग ६ माह दे जिससे नशे की लत जड़ से खत्म हो जाए |
ये दवा विज्ञापन वाले बना कर टी वी में आपको ही उलटे सीधे और मनमाने दामो पे बेचते है जबकि आप इसे घर पे ही बना सकते है .

एक और नशा मुक्ति उपाय :-

  • आयुर्वेदिक ओषधि है जिसको आप सब अच्छे से जानते है और पहचानते हैं राजीव भाई ने उसका बहुत इस्तेमाल किया है लोगो का नशा छुड्वने के लिए और उस ओषधि का नाम है अदरक और ये आसानी से सबके घर मे होती है इस अदरक के टुकड़े कर लो छोटे छोटे और उस मे नींबू निचोड़ दो थोड़ा सा काला नमक मिला लो और इसको धूप मे सूखा लो सुखाने के बाद जब इसका पूरा पानी खतम हो जाए तो इन अदरक के टुकड़ो को अपनी जेब मे रख लो जब भी दिल करे गुटका खाना है तंबाकू खाना है बीड़ी सिगरेट पीनी है तो आप एक अदरक का टुकड़ा निकालो मुंह मे रखो और चूसना शुरू कर दो और यह अदरक ऐसे भी अदभुत चीज है आप इसे दाँत से काटो मत और सवेरे से शाम तक मुंह मे रखो तो शाम तक आपके मुंह मे सुरक्षित रहता है इसको चूसते रहो आपको गुटका खाने की तलब ही नहीं उठेगी तंबाकू सिगरेट लेने की इच्छा ही नहीं होगी शराब पीने का मन ही नहीं करेगा जैसे ही इसका रस लाड़ मे घुलना शुरू हो जाएगा आप देखना इसका चमत्कारी असर होगा आपको फिर गुटका –तंबाकू शराब –बीड़ी सिगरेट आदि की इच्छा ही नहीं होगी सुबह से शाम तक चूसते रहो और आप ने ये 10 -15 -20 दिन लगातार कर लिया तो हमेशा के लिए नशा आपका छूट जाएगा
  • अदरक मैं ऐसे क्या चीज है यह अदरक मे एक ऐसे चीज है जिसे हम रसायनशास्त्र (केमिस्ट्री ) मे कहते है इसे सल्फर !
  • अदरक मे सल्फर बहुत अधिक मात्रा मे है ! और जब हम अदरक को चूसते है जो हमारी लार के साथ मिल कर अंदर जाने लगता है ! तो ये सल्फर जब खून मे मिलने लगता है ! तो यह अंदर ऐसे हारमोनस को सक्रिय कर देता है ! जो हमारे नशा करने की इच्छा को खत्म कर देता है ! और विज्ञान की जो रिसर्च है सारी दुनिया मे वो यह मानती है की कोई आदमी नशा तब करता है ! जब उसके शरीर मे सल्फर की कमी होती है ! तो उसको बार बार तलब लगती है बीड़ी सिगरेट तंबाकू आदि की ! तो सल्फर की मात्रा आप पूरी कर दो बाहर से ये तलब खत्म हो जाएगी ! इसका राजीव भाई ने हजारो लोगो पर परीक्षण किया और बहुत ही सुखद प्रणाम सामने आए है ! बिना किसी खर्चे के शराब छूट जाती है बीड़ी सिगरेट शराब गुटका आदि छूट जाता है ! तो आप इसका प्रयोग करे!
  • अदरक के रूप मे सल्फर भगवान ने बहुत अधिक मात्रा मे दिया है ! और सस्ता भी है. इसी सल्फर को आप होमिओपेथी की दुकान से भी प्राप्त कर सकते हैं ! आप कोई भी होमिओपेथी की दुकान मे चले जाओ और विक्रेता को बोलो मुझे सल्फर नाम की दवा दे दो ! वो दे देगा आपको शीशी मे भरी हुई दवा दे देगा और सल्फर नाम की दावा होमिओपेथी मे पानी के रूप मे आती है प्रवाही के रूप मे आती है जिसको हम घोल (Dilution )भी कहते है अँग्रेजी मे .
  • यह पानी जैसे आएगी देखने मे ऐसे ही लगेगा जैसे यह पानी है ये 5 मिली लीटर दवा की शीशी दस या पन्द्रह रूपये की आती है और उस दवा का एक बूंद जीभ पर दाल लो सवेरे सवेरे खाली पेट फिर अगले दिन और एक बूंद डाल लो .ये 3 खुराक लेते ही 50 से 60 % लोग की दारू छूट जाती है और जो ज्यादा पियक्कड है जिनकी सुबह दारू से शुरू होती है और शाम दारू पर खतम होती है वो लोग हफ्ते मे दो दो बार लेते रहे तो एक दो महीने तक करे बड़े बड़े पियक्कड की दारू छूट जाएगी .बस हो सकता है कि दो या तीन महीने का समय लगे . यही सल्फर अदरक मे होता है .और इसका अर्क ही होमिओपेथी की दुकान मे भी उपलब्ध है आप आसानी से खरीद सकते है लेकिन जब आप होमिओपेथी की दुकान पर खरीदने जाओगे तो वो आपको पुछेगा कितनी ताकत (पोटेंसी)की दवा दूँ आप उसको कहे 200 potency की दवा देदो या आप सल्फर 200 कह कर भी मांग सकते है.लेकिन जो बहुत ही पियकर है उनके लिए आप 1000 Potency की दवा ले. अगर समाज सेवा करनी है तो आप 200 मिली लीटर का बोतल खरीद लो एक 150 से रुपए मे मिलेगी और आप उससे 10000 लोगो की शराब छुड़वा सकते हैं.लेकिन साथ मे आप मन को मजबूत बनाने के लिए रोज सुबह बायीं नाक से सांस ले और अपनी इच्छा शक्ति मजबूत करे.
  • बहुत ज्यादा चाय और काफी पीने वालों के शरीर मे आर्सेनिक (ARSENIC ) तत्व की कमी होती है,उसके लिए आप ARSENIC- 200 का प्रयोग करे.चाय और काफी भी छुट जायेगी .
  • गुटका,तंबाकू,सिगरेट,बीड़ी पीने वालों के शरीर मे फास्फोरस (PHOSPHORUS) तत्व की कमी होती है उसके लिए आप PHOSPHORUS 200 का प्रयोग करे ये गुटका,तंबाकू,सिगरेट,बीड़ी इत्यादि छुडा देगा .
  • शराब पीने वाले मे सबसे ज्यादा सल्फर (SULPHUR) तत्व की कमी होती है उसके लिए आप SULPHUR 200 का प्रयोग करे ये शराब को छुडा देता है लेकिन हो सके तो आप बाज़ार में मिलने वाली अदरक से ही शुरुवात करे आप को इससे ही पूरा लाभ मिल जाएगा …!

शराब का नशा उतारने का तरीका  – Liquor , Wine

—   एक कप पानी में एक नीम्बू का रस मिलाकर कर हर दस मिनट में पिलाएं।

नींबू  सेब ( apple ) का जूस पिलाएं।

दिमागी शक्ति

—  सिर पर ठण्डा पानी डालें।

—  अमरुद खिलाएं।

 

—  एक गिलास पानी में इमली को भिगोकर मसलकर छान लें। इसमें गुड़ मिलाकर पिलायें।

—  पिसा हुआ धनिया और शक्कर मिलाकर खिलाएं।

—  दो चम्मच देसी घी में दो चम्मच शक्कर मिलाकर खिलाएं।

शराब छुड़ाने के घरेलु उपाय – How to Leave wine

1)कहतें हैं कि शराब पीने की जिसे आदत पड़ जाती है, आसानी से नहीं छुटती, लेकिन होम्योपेथी में सेलेनियम-30 एक ऐसी दवा है, जिसके कुछ दिनों का सेवन करने के बाद शराब पीने वाले को शराब खराब लगने लगती है! एक दिन में तीन बार सेवन कि गई पहले दिन कि खुराकें ही आश्चर्यजनक लाभ पहुंचाती है और शराब पीने कि इच्छा समाप्त हो जाती है! पूरा लाभ पाने के लिए कुछ दिनों तक नियमित सेवन कराएं!

2)सेब का रस बार बार पीने से और भोजन के साथ सेब खाने से भी शराब कि आदत छुट जाती है! यदि उबले हुए सेबों को दिन में तीन बार खिलाया जाए, तो कुछ ही दिनों में शराब पीने कि लत छुट जाती है!

3) 500 ग्राम नई देसी अजवाइन को पीसकर उसे 7 लीटर पानी में दो दिन के लिए भिगो दें! फिर धीमी आंच पर इतना पकाएं कि पानी लगभग 2 लीटर रह जाए!
ठंडा होने पर छान कर बोतल में भर दें! शराब कि तलब लगने पर 5 चम्मच कि मात्रा में पीते रहने से भी शराब पीने कि आदत छुट जाती है!

4)शराब छुड़ाने में एक दवा ऐकेम्प्रोसेट ईजाद हुई है! इसे अब तक दस लाख से ज्यादा लोगों ने इस्तिमाल किया है और बेहतर परिणाम मिले हैं! इस दवा को फ्रांस में लें स्थित ‘लिफा एस.ए कम्पनी ने बनाया है! फिलहाल ये दवा एशिया, यूरोप, दक्षिणी अमेरिका आदि के देशों में आसानी से उपलब्ध है!

• जिन महिलायों के पति अधिक शराब का सेवन करते हैं तथा अपनी आय का अधिक हिस्सा शराब पर लुटातें हैं,उनके लिए यह सब से सरल उपाय है|जिस दिन आपके पति शराब पीकर घर आयें और अपने जूते और उनका जूता अपने आप ही उल्टा हो जाये तो आप उस जूते के वजन के बराबर आटा लेकर उसकी बिना तवे तथा चकले की मदद से रोटी बनाकर कुत्ते को खिला दें|कुछ ही समय में वह शराब से घृणा करने लगेंगे|यदि ऐसा संजोग लगातार कम से कम तीन दिन हो जाये तो वह तुरंत ही शराब छोड़ देंगे|
• शराब छुड़ाने का एक उपाए यह भी है की आप किसी भी रविवार को एक शराब की उस ब्रांड की बोतल लायें जो ब्रांड आपके पति सेवन करते हैं|रविवार को उस बोतल को किसी भी भैरव मंदिर पर अर्पित करें तथा पुन: कुछ रूपए देकर मंदिर के पुजारी से वह बोतल वापिस घर ले आयें|जब आपके पति सो रहें हो अथवा शराब के नशे में चूर होकर मदहोश हों तो आप उस पूरी बोतल को अपने पति के ऊपर से उसारते हुए २१ बार “ॐ नमः भैरवाय”का जाप करें|उसारे के बाद उस बोतल को शाम को किसी भी पीपल के वृक्ष के नीचे छोड़ आयें|कुछ ही दिनों में आप चमत्कार देखेंगी|

• शराब छुडवाने का एक यह भी उपाय है की आप एक शराब की बोतल किसी शनिवार को पति के सो जाने के बाद उन पर से २१ बार वार लें|उस बोतल के साथ किसी अन्य बोतल में आठ सो ग्राम सरसों का तेल लेकर आपस में मिला लें और किसी बहते हुए पानी के किनारे में उल्टा गाढ़ दें जिससे बोतलों के ऊपर से जल बहता रहे|

अपनी शराब में यह होम्योपैथिक दवा प्रति लीटर में बारह बूंद मिला कर रख लें और यकीन मानिए कि जो लोग आपके साथ शराब पीते हैं वे दो महीने में खुद ही शराब पीना बंद कर देंगे,दवा का नाम है SPIRTAS GLANDIUM QUERCUS . यह वही दवा है जिसका प्रचार कर-करके तमाम दवाखानों ने करॊड़ो रुपए कमा लिए हैं । हम किस दवा कए बाद जब शराबी की आदत छूट जाती है तो उसे दो माह तक सुबह शाम दो-दो चम्मच गुलकन्द(प्रवाल मिश्रित) खिलाते हैं और इसके बीस मिनट बा्द दो चम्मच अश्वगंधारिष्ट बराबर पानी के साथ देते हैं । इससे उसका खोया स्वास्थ्य वापस आ जाता है । आप भी इसी तरह से अपनी टूटती हुई कसमों से बच सकते हैं और यदि नियमित रूप से प्राणायाम करते हैं तो फिर तो सोने में सुगंध जैसी बात है ।

शिमला मिर्च(कैप्सिकम) जो कि मोटी-मोटी होती हैं व खाने में तीखी नहीं होती व सब्जी बनाने में प्रयोग करी जाती हैं ,ले लीजिए और उनका जूसर से रस निकाल लीजिए व इस रस का सेवन दिन में दो बार आधा कप नाश्ते या भोजन के बाद करें । आप चमत्कारिक रूप से पाएंगे कि आपकी शराब की तलब अपने आप घटने लगी है और एक दिन आप खुद ही पीने से इंकार कर देते हैं चाहे कोई कितना भी दबाव क्यों न डाले । ये दोनो उपाय सन्यासियों के आजमाए हुए हैं जोकि लोगों की शराब छुड़ाने के प्रसिद्ध रहे हैं। आप यकीन मानिये कि इन सरल से उपायों से चालाक किस्म के लोग मजबूर शराबियों की आदत छुड़ाने की दवा के रूप में देकर लाखों रुपए कमाते हैं

सोने-चांदी का काम करने वाले सोनारों के पास से शुद्ध गंधक का तेज़ाब यानि कि सल्फ़्युरिक एसिड ले आइए और आप जो शराब पीने जा रहे हैं उसके बने हुए पैग में चार बूंद यह तेज़ाब डाल दीजिए और जैसे सेवन करते है वैसे ही पीजिए और आप देखेंगे कि धीरे-धीरे आपकी शराब पीने की इच्छा अपने आप ही कम होने लगी है । इसी क्रम में आप एक दिन खुद ही शराब के प्रति अरुचि महसूस करने लगेंगे और पीना अपने आप छूट जाएगा ,ध्यान रखिए कि आप और कोई उपाय न करें बस खाने पर ध्यान दें कि स्वास्थ्यवर्धक आहार लें

होम्योपैथिक उपचार

शराब एवं अन्य नशों को छोड़ने के लिए

पहले दिन ‘सल्फर’ 200 शक्ति की 10-12 गोलियां मुंह में रखकर चूस लें। इस दिन कोई और दवा न लें। दूसरे दिन रात को ‘नक्सवोमिका’ 200 शक्ति की 10-12 गोलियां, सोते समय सिर्फ एक बार चूस लें। (किसी भी होमियोपैथिक दवा को खाने के आधा घंटा पहले व आधा घंटा बाद तक कुछ नहीं खाना-पीना चाहिए।) छ: दिन तक रात में ‘नक्सवोमिका’ लेने के बाद सातवें दिन फिर ‘सल्फर’ 200 शक्ति की एक खुराक ले लें। उस दिन रात में ‘नक्सवोमिका’ न लें। अफीम-गांजा पीने वाले इसके अलावा ‘एवेना सैटाइवा’ मदर टिंचर की 50-55 बूंदें आधा कप पानी में घोलकर पी लें। तीन घंटे बाद ‘पैसीफ्लोरा’ औषधि (मदर टिंचर) 50-55 बूंदें आधा कप पानी में डालकर पी लें। ऐसा दिन में दो बार करें। फिर रात में ‘नक्सवोमिका’ 200 शक्ति की एक खुराक ले लें।

इसके बाद नींद न आना, बेचैनी, छटपटाहट व अंट-शंट प्रलाप करने की भी शिकायतें रहती हैं। इन शिकायतों को दूर करने वाली दवाएं हैं – ‘बेलाडोना’, ‘हायोसाइमस’ और ‘स्ट्रामोनियम’, बहुत ज्यादा प्रलाप करता हो, तेजी से बड़-बड़ करता हो, तो ‘बेलाडोना’, बिस्तर से उठ-उठ कर भागता हो, तो ‘स्ट्रामोनियम’ और यदि मध्यम स्थिति हो, तो ‘हायोसाइमस’ देनी चाहिए। इस स्थिति के रोगी को लोक-लाज और मर्यादा का ख़्याल नहीं रहता। वह अपने कपड़े भी उतार फेंकता है। शक्ति का चुनाव लक्षणों की प्रचण्डता के आधार पर करना चाहिए। इसी प्रकार जिनके हाथ-पैरों में कम्पन होता हो, उनके लिए ‘एण्टिमटार्ट’ औषधि बहुपयोगी है। जिन्हें नशा न करने के कारण बेचैनी होने से नींद न आती हो, उन्हें ‘स्कुटैलेरिया’ औषधि के मूल अर्क की 20-22 बूंदें आधा कप कुनकुने पानी में सोते समय पिलानी चाहिए, किंतु इस सबके साथ ही नशा छोड़ने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति का होना अत्यावश्यक है।

• शराब की आदत को छुड़ाने में ‘एपोसायनमकैन’ औषधि मूल अर्क में एवं ‘सल्फ्यूरिक एसिड’ औषधि 6 शक्ति में अत्यंत कारगर रहती है।
• हाथ-पैरों में ऐंठन रहने पर ‘जिंकम मेट’ 30 शक्ति में, छाती में जकड़न रहने पर ‘क्यूप्रममेट’ 30 शक्ति में, हाथ-पैरों में अजीब-सी सनसनाहट, बेचैनी रहने व दबाने पर आराम मिलने पर ‘मैगफॉस’ 200 में देनी चाहिए।
• हाथ-पैरों-शरीर के दर्द में उसी करवट लेटने पर दर्द बढ़े, तो ‘कालीकार्ब’ 30 में लें।

नशे की लत से छुटकारा

पहला दिन रात को सोते समय ‘नक्सवोमिका’ 200 शक्ति की 10-12 गोलियां मुंह साफ करके चूस लेनी चाहिए। दवा लेने से आधा घण्टे पहले से और आधा घण्टे बाद तक कोई चीज खाएं-पिएं नहीं। यह दवा सोने से पहले, पानी से कुल्ले करके मुंह साफ करके लेनी चाहिए और इसके बाद फिर कुछ खाना या पीना नहीं चाहिए।

दूसरा दिन सुबह खाली पेट, पानी से कुल्ले करने के बाद, ‘सल्फर’ 200 शक्ति की 10-12 गोलियां मुंह में डालकर चूस लें। आधे घण्टे तक कुछ खाएं-पिएं नहीं। आधे घण्टे बाद दन्तमंजन या टूथपेस्ट आदि करें। इस दिन फिर कोई दवा न लें।

तीसरा दिन ‘सल्फ्यूरिक एसिड’ मदर टिंचर की पांच-छ: बूंदें एक गिलास पानी में घोलकर सुबह पी लें। इसी तरह दूसरी खुराक दोपहर और तीसरी खुराक शाम को पी लें। इस दिन रात को, पहले दिन की तरह, सोने से पहले, ‘नक्सवोमिका’ 200 शक्ति की 10-12 गोलियां मुंह में रखकर चूस लें।

चौथे, पांचवें, छठे और सातवें दिन दिन में 3 बार, ‘एसिड सल्फ’ मदर टिंचर और रात को सोते समय ‘नक्सवोमिका’ 200 शक्ति में, तीसरे दिन की चिकित्सा की तरह, सेवन करते रहें।

आठवां दिन सुबह उठकर खाली पेट (दूसरे दिन की चिकित्सा की तरह) ‘सल्फर’ 200 शक्ति की 10-12 गोलियां मुंह में डालकर चूस लें। फिर दिनभर कोई दवा न लें। इसी क्रम को दो बार दोहराएं।

शराब पीने की वजह से यदि शराबी व्यक्ति के पेट में पीड़ा हो या बेचैनी हो, तो ‘सल्फर’ वाले दिन को छोड़कर, शेष दिनों में अन्य दवाएं लेते हुए, एक घण्टे का अन्तर रख कर ‘फॉस्फोरस’ 30 शक्ति की 10-12 गोलियां सुबह और शाम में मुंह में डालकर चूस लेनी चाहिए। लाभ होने पर इस दवा का सेवन बन्द कर देना चाहिए।

यदि शराबी व्यक्ति शारीरिक कमजोरी का अनुभव करता हो, तो उसे ‘एसिड फॉस’ मदर टिंचर की 6-6 बूंद आधा कप पानी में घोलकर सुबह-शाम भोजन करने के आधे घंटे बाद पी लेनी चाहिए। इस दवा से हाथ-पैरों की कमजोरी और पीड़ा दूर होती है, शारीरिक व मानसिक शक्ति बढ़ती है, चिड़चिड़ापन और मानसिक दौर्बल्य दूर होता है। लाभ होने पर दवा बन्द कर दें।

यदि शराबी व्यक्ति को नींद न आती हो, तो ‘एवेना सैटाइवा’ एवं ‘पसाफ्लोरा’ मदर टिंचर की 15 बूंद आधा कप पानी में घोलकर सुबह-शाम पी लें। लाभ होने पर दवा बन्द कर दें।

यह बात ध्यान में रखें कि दो दवाओं को सेवन करने के बीच एक घण्टे का फासला रखें और दवा लेने के आधा घण्टा पहले से खाना-पीना बर कर दें और आधा घण्टा बाद तक भी कुछ खायें-पीयें नहीं।

योग है शराब छुड़ाने की रामबाण दवा

योगासन: सर्वागासन (शोल्डर स्टैंड), सेतु बंधासन (ब्रिज मुद्रा), भुजंगासन (कोबरा पोज), शिशुआसन (बाल पोज).

प्राणायाम: सहज प्राणायाम, भसीदा प्राणायाम, नाड़ी शोधन प्राणायाम (नोस्ट्रिल ब्रीदिंग तकनीक).

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