IMC SHRI TULSI DROPS

IMC SHRI TULSI DROPS 20ML

 Shri tulsi 

तुलसी SHRI TULSI भारतीय संस्कृति का एक प्राचीनतम हिस्सा है। सदियों से तुलसी की भारत में पूजा की जा रही है। इसका कारण हैं इसके अंतहीन चमत्कारी और औषधीय गुण। आयुर्वेद में तुलसी को सर्वरोग नाशक कहा गया है। तुलसी जड़ी-बूटियों की रानी मानी जाती है क्योंकि तुलसी के समान स्वास्थ्य लाभ देने वाली कोई दूसरी जड़ी-बूटी संसार में नहीं है। तुलसी पौष्टिक गुणों से भरपूर है तथा इसमें हमारे शरीर और स्वास्थ्य के लिये अनिवार्य विटामिन ए,बीटाकेरोटीन, पोटैशियम, आयरन, कॉपर, मैगनीज़ और मैग्नीशियम जैसे खनिज (मिनरल्स) प्राकृतिक तौर पर पाये जाते हैं। 

तुलसी दिल के रोगियों के लिए बेहतरीन टॉनिक है। संक्रमण को रोकने के लिए तुलसी का इलाज बहुत प्रभावी है। यह एंटीऑक्सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटी-वायरल, एंटी-एलर्जिक, एंटीबैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-डीसिज गुणों से परिपूर्ण है।

अपने अंतहीन स्वास्थ्य सम्बन्धी गुणों के कारण तुलसी सैंकड़ों बीमारियों में लाभ प्रदान करती है, जैसे थकान, तनाव, भूख में कमी, खाँसी-जुकाम, उल्टी, साधारण बुखार, मोटापा, अल्सर, जोड़ों के दर्द, ब्लॅड प्रैशर, शुगर, एलर्जी, फ्लू, स्वाइन फ्लू, डेंगू, हैपेटाइटिस, पेशाब सम्बन्धी समस्या, वातरोग, दिल के रोग, फेफड़ों के रोग, नपुसंकता आदि।

तुलसी का प्रयोग एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी तथा यूनानी दवाओं में भी किया जाता हैं।

महर्षि चरक तुलसी के गुणों का वर्णन करते हुए लिखते हैं- तुलसी, हिचकी, खांसी, विष, श्वास रोग और दर्द को नष्ट करती है। यह पित्तकारक, कफ वातनाशक और शरीर और खाद्य पदार्थों के दुर्गन्ध को दूर करता है। सिर का भारी होना, माथे का दर्द, आधा शीशी, मिर्गी, नासिका रोग तथा कृमि रोग तुलसी से दूर होते हैं।

महर्षि सुश्रुत कहते हैं – (सूत्र—46) तुलसी कफ, वात, विष विकार, श्वास, खांसी और दुर्गन्ध नाशक है। कफ और वायु को नष्ट करती है।

भाव प्रकाश में वर्णन आता है कि यह हृदय के लिये हितकर उष्ण तथा अग्निदीपक है। मूत्र विकार, रक्त विकार को नष्ट करती है। यह पित्त नाशक, वात-कृमि तथा दुर्गन्ध नाशक है। यह पसली का दर्द, खांसी, श्वास, हिचकी आदि विकारों को दूर करती है।

संसार में लगभग 60 तरह की तुलसी के पौधे पाये जाते हैं, लेकिन भारतवर्ष में मुख्यतः 5 तरह की तुलसी के पौधे का इस्तेमाल औषधीयरूप में किया जाता है।

आई.एम.सी. की श्री तुलसी SHRI TULSI को भी इन पांचों प्रकार की तुलसी के पौधे का सत निकाल कर रोगों से आपकी रक्षा करने के लिये और आपके स्वास्थ्य को लम्बे समय तक बरकरार रखने के लिये तैयार किया गया है। 

5 तरह की लाभदायक तुलसियों का सत्त्

श्याम तुलसी syam Tulsi : ocimum sanctum

विष्णु तुलसी vishnu Tulsi : ocimum sanctum 

राम तुलसी Ram Tulsi : Ocimum Gratissimum

वन तुलसी Van Tulsi : Ocimum Basalicum

निम्बू तुलसी Nimbu Tulsi : Ocimum Americanum

श्री तुलसी (SHRI TULSI) नियमित उपयोग शरीर के प्रत्येक भाग और प्रत्येक नस-नाड़ी में जमा हुई गंदगी को गला कर बाहर निकालने में और खोये हुये स्वास्थ्य को वापिस पाने में बहुत मदद करता है।alt=“Imc Shri tulsi drops”>

श्री तुलसी (SHRI TULSI) ड्रॉप्स के लाभ व उपयोगः

अपने स्वास्थ्य को बरकरार रखने के लिये श्री तुलसी ड्रॉप्स की एक बूंद, एक ग्लास पानी या चाय में डालकर इस्तेमाल करें।

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प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन श्री तुलसी ड्रॉप्स की 8-10 बूंदें अवश्य सेवन करनी चाहिए।

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प्रातःकाल खाली पेट 4-5 बूँदे श्री तुलसी का सेवन करने से शारीरिक बल और स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है।

तुलसी को शहद में मिलाकर प्रतिदिन पीने से स्मरण शक्ति बढ़ती है और बुद्धि विकसित होती है।

नहाने के पानी में 4-5 बूंदें श्री तुलसी ड्रॉप्स मिलाकर नहाने से पानी रोगाणुमुक्त हो जाता है और शरीर और त्वचा की अच्छे ढंग से सफाईहो जाती है।

छोटे बच्चों को श्री तुलसी में मिश्री घोलकर सुबह देने से बच्चों की उल्टी, दस्त, खांसी,सर्दी और जुकाम में आराम मिलता है।

जुकाम, छींके, सिरदर्द, बुखार, दमा आदि में श्री तुलसी की दो बूँदे शहद में मिलाकर लेने से बहुत लाभ होता है।

ज्वर और वमन में श्री तुलसी की 8-10 बूँदे पिसी हुई काली मिर्च के साथ पीने से वमन और ज्वर से राहत मिलती है।

श्वास की तकलीफ में श्री तुलसी की 4-5 बूँदे , काले नमक के साथ पीने से आराम मिलता है।

दांत दर्द, दांत से खून आने पर या दांतों में कीड़े लगने पर श्री तुलसी की 8-10 बूँदे पानी में डालकर कुल्ला करने से आराम मिलता है। 

दाँतों और मुख की बेहतर सफाई के लिये आई.एम.सी डेंटल क्रीम का इस्तेमाल करें। ब्रश करने से पहले आई.एम.सी डेंटल क्रीम पर श्रीतुलसी ड्रॉप्स की 2-3 बूंदें डाल लें।

मुंह की दुर्गन्ध को दूर करने के लिए श्री तुलसी की 1-2 बूँदे मुंह में डालें।

मुंह और गले में छाले, गले के दर्द में श्री तुलसी की 8-10 बूँदे गर्म पानी में डालकर गरारे करें।

श्री तुलसी रक्त को साफ करने में सहायक है। इसका एंटी-बैक्टीरियल गुण मुंहासों को आने से रोकने में मदद करता है।

तुलसी में पाये जाने वाले थाइमोल से त्वचा सम्बन्धी रोगों में लाभ मिलता है।

चेहरे से प्रत्येक प्रकार के धब्बों, छाईयों, कील-मुहांसों व झुर्रियों को नष्ट करने के लिये,त्वचा में निखार लाने के लिये सुबह नहाने के बादव रात को सोते समय श्री तुलसी ड्रॉप्स तथा गुलाब जल की 8-10 बूँदे एलो जैल में मिलाकर चेहरे व त्वचा पर लगायें

दाद, खाज, खुजली, एक्जिमा और त्वचा की अन्य समस्याआओं के लिए तुलसी की बूंदों को प्रभावित जगह पर लगाने से कुछ दिनों मेंयह रोग दूर हो सकता है।

पैरों में फंगस, दुर्गन्ध व घाव होने पर 10 ग्राम एलो जैल तथा 10 मि.ली. रोज़ वाटर में श्री तुलसी ड्रॉप्स की  4-5 बूँदे मिलाकर पैरों में लगायें।

श्री तुलसी घावों को भरने की अच्छी औषधि है।

आग से जलने व किसी भी विषैले कीड़े या मच्छर काटने पर श्री तुलसी को लगाने से आराम मिलता है।

सिर में फोड़े, फुसी या घाव होने पर imc हर्बल हेयर ऑयल में श्री तुलसी ड्रॉप्स की 4-5 बूँदे मिलाकर सिर में धीरे-धीरे लगायें।

सिरदर्द होने पर श्री तुलसी की 8-10 बूँदे , एलो जेल में मिलाकर सिर और बालों की जड़ों में मालिश करने से सिरदर्द की समस्या से आराम मिलता है।

बाल झड़ने या सफेद होने अथवा सिकरी (डेंड्रफ) होने पर श्री तुलसी की 8-10 बूँदे , एलो जेल में मिलाकर सिर और बालों की जड़ों मेंमालिश करने से बाल झड़ने की समस्या से आराम मिलता है।

बालों में जुऐं और लीखें हो जायें तो श्री तुलसी ड्रॉप्स और नींबू का रस समान मात्रा में मिलाकर सिर के बालों में अच्छी तरह से लगायें। 3-4 घंटे तक लगा रहने दें और फिर आई.एम.सी केशविन एंटी डैंड्रफ़ शैम्पू से सिर धोयें। यह मिश्रण रात को सिर में लगाकर सुबह भी सिर को धो सकते हैं।

यदि कनपटी में दर्द हो तो श्री तुलसी को कनपटी पर मलने से आराम मिलता है।

कान की सफाई करने और सुनने की क्षमता को बेहतर बनाने के लिये श्री तुलसी ड्रॉप्स की एक-एक बूंद दोनों कानों में टपकायें। 

कान दर्द अथवा कान बहने पर श्री तुलसी ड्रॉप्स को हल्का सा गरम करके एक-एक बूंद कान में टपकायें।

नाक में घाव या फोड़ा होने पर अथवा नकसरी फूटने पर नाक में श्री तुलसी ड्रॉप्स की 1 बूंद डालें।

पेट दर्द, घबराहट, बेचैनी, दस्त होने, चक्कर आने, जी मिचलाने पर थोड़ी-थोड़ी देर बाद

पानी में श्री तुलसी ड्रॉप्स की 3-5 बूँदें पिलाये । 

एसिडिटी, अपच रहने पर सुबह-शाम श्री तुलसी ड्रॉप्स व एलो डाईजैस्ट की 8 से 10 बूंदें, 30 मि.ली. एलोवेरा जूस, 10 मि.ली. लिवकेयर सिरप में मिलाकर पीयें।

श्री तुलसी वजन को नियंत्रित करने में सहायक है। मोटा व्यक्ति प्रयोग में लाये तो वजन घटता है

श्री तुलसी वजन को नियंत्रित करने में सहायक है। पतला व्यक्ति प्रयोग करता है तो उसका वजन सामान्य हो जाता है।

घुटनों व जोड़ों के दर्द से राहत व बचाव हेतू 5 मि.ली. पैन अवे ऑयल तथा 1 बूंद श्री तुलसी ड्रॉप्स को हल्का गर्म करके दर्द वाली जगहपर हल्के-हल्के हाथ से दिन में 2 बार मालिश करें।

तुलसी के नियमित सेवन से रक्त अल्पता दूर होती है। हीमोग्लोबिन तेजी से बढ़ता है।

श्री तुलसी ड्रॉप्स हृदय के लिए बेहतरीन टॉनिक की तरह हितकारी है। इसके नियमित उपयोग से कोलेस्ट्रोल का स्तर कम होने लगता है, हार्ट अटैक और स्ट्रोक से रोकथाम होती है।

यदि किसी महिला का मासिक धर्म अनियमित है तो सुबह-शाम 8-10 बूंदें गर्म पानी में मिलाकर पीने से मासिक धर्म खुलकर होता है एवंकमर दर्द से राहत दिलाने में भी सहायक होता है।

गुप्तांगों को साफ रखने के लिये 10 ग्राम एलो जैल में श्री तुलसी ड्रॉप्स (Shri tulsi)

की 1 बूंद मिलाकर अंगों व जोड़ों पर लगायें।

शीघ्र पतन, स्वप्नदोष, शिथिलता, वीर्य अथवा सेक्स पावर में कमी होने पर श्री तुलसी ड्रॉप्स (Shri tulsi)

का नियमति उपयोग लाभ प्रदान करता है।

कैंसर में श्री तुलसी (Shri tulsi)

की 8-10 बूँदे एक गिलास छाछ के साथ सुबह, शाम पीयें।

श्री तुलसी (Shri tulsi) की कुछ बूँदों में थोड़ा सा नमक मिलाकर बेहोश व्यक्ति की नाक में डालने से उसे शीघ्र होश आता है।

जहरीले जीव सांप, बिच्छू, भौंरों के काटने पर श्री तुलसी (Shri tulsi)

को प्रभावित स्थान पर लगाने से आराम मिलता है।

श्री तुलसी(Shri tulsi) 8-10 बूँदे , बॉडी ऑयल के के साथ मिलाकर शरीर पर मलकर सोये मच्छरों के प्रकोप से बच जायेंगे।

फर्श को साफ करने वाले पानी में तथा कूलर के पानी में 8-10 बूँदे श्री तुलसी की डालने से उस घर से मक्खी-मच्छर भाग जाते हैं तथासारा घर विषाणु व रोगाणु मुक्त हो जाता है। 

सावधानी : श्री तुलसी के साथ दूध, मूली, नमक, प्याज, लहसुन, खट्टे फल या मांसाहार का सेवन हानिकारक है।

चेतावनी:- श्री तुलसी आँखों में ना डालें। आँखों के सम्पर्क में आने पर आँखों को तुरन्त साफ पानी से अच्छी तरह धो लें और नेत्र चिकित्सक से सम्पर्क करें।

कुछ कम्पनियां तुलसी के अर्क का उपयोग करती हैं। आइए जानते हैं श्री तुलसी (SHRI TULSI) और अर्क बनाने की विधि:

अर्क बनाने की विधि

एक बर्तन में तुलसी के पत्तों को पानी में मिलाकर उबाला जाता है। तुलसी पानी वाष्प के रूप में फनल के रास्ते दूसरे बर्तन में जाता है, जहां पर पानी को ठंडा करके पुन: पानी में बदला जाता है। वाष्पीकरण करने से तुलसी के पौष्टिक तत्व नष्ट हो जाते हैं एवम् जितना चाहे पानी डालकर तुलसी का अर्क बनाया जा सकता है। श्री तुलसी बनानेकी विधि श्री तुलसी बनाने के लिए तुलसी के पत्तों से आधुनिक मशीनों के द्वारा तुलसी का तेल के रूप में सत् निकालकर श्री तुलसी कानिर्माण किया जाता है जिसमें एक भी बूँद पानी की नहीं मिलायी जाती । तुलसी के तेल को एक खास विधि से पानी में घुलनशील बनाया जाता है। 

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