Turmeric-Curcuma longa

        Turmeric-Curcuma longa-हल्दी

‌‌‌व्यवहारिक नाम: Turmeric

वानस्पतिक ‌‌‌नाम: Curcuma longa

यह अदरक की प्रजाति का 5-6 फुट तक बढ़ने वाला पौधा है जिसमें जड़ की गाठों में हल्दी मिलती है। रसोई में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। ‌‌‌यह दो प्रकार की होती है। ताजी हल्दी तथा आमी हल्दी का प्रयोग सलाद के रूप में भी किया जाता है। आमी हल्दी का रंग सफेद एवं सुगंध आम के समान होता है। अनेक मांगलिक कार्यों में भी हल्दी का प्रयोग किया जाता है।

हल्दी कड़वी, कषाय (कसैली), कृमिनाशक, गरम उष्णवीर्य, गर्भाशय की शुद्धि करने वाली, जठराग्निवर्धक, तीखी, त्वचारोग-नाशक, पचने में हल्की, पौष्टिक, रक्तवर्धक, रक्तशोधक, रुचिवर्धक, वात-पित्त-कफशामक, विषनाशक, शरीर के रंग को साफ करने वाली, शीतवीर्य ‌‌‌एवं सूजन नष्ट करने वाली ‌‌‌होती है।

यह कोढ़ व्रण (घाव), आमदोष, प्रमेह, शोष, कर्णरोग, पुरानी सर्दी आदि को मिटाने वाली है। यह यकृत को बलवान बनाती है एवं रस, रक्त आदि सब धातुओं पर प्रभावशाली काम करती है। ‌‌‌यह सर्दी खाँसी, गर्मी की खाँसी, दमा, बुखार, सन्निपात ज्वर, मार-चोट के कारण होनेवाली पीड़ा तथा सूजन एवं मुखरोग में लाभदायक है। यूनानी मत के अनुसार आमी हल्दी मूत्र की रुकावट एवं पथरी का नाश करती है।

न्यूट्रिशनल वैल्यू प्रति 100 ग्राम‌‌‌‌‌‌

ऊर्जा (‌‌‌किलो कैलोरी) 354
कार्बोहाईट्रेस (ग्राम) 64.9
शर्करा (ग्राम) 3.2
फाइबर (ग्राम) 21.1
प्रोटीन (ग्राम) 7.8
वसा (ग्राम) 9.9
‌‌‌ओमेगा-3 फैटी एसीड (मिलीग्राम) 482.0
‌‌‌ओमेगा-6 फैटी एसीड (मिलीग्राम) 1694.0
कॉलेस्ट्राल (मिलीग्राम) 0.0
‌‌‌पानी (ग्राम) 11.4
विटामिन  
थायमिन (‌‌‌विटामीन बी1) (मिलीग्राम) 0.2
राईबोफ्लेविन (‌‌‌विटामीन बी2) (मिलीग्राम) 0.2
नियासिन (‌‌‌विटामीन बी3) (मिलीग्राम) 5.1
‌‌‌एडेनिन (‌‌‌विटामीन बी4) (माईक्रोग्राम)
पेंटोथिनिक एसीड (‌‌‌विटामीन बी5) (मिलीग्राम)
पायरीडॉक्सिन ((‌‌‌विटामीन बी6) (मिलीग्राम) 1.8
‌‌‌बायोटिन (‌‌‌विटामीन बी7 / H) (मिलीग्राम)
‌‌‌इनोसीटोल (‌‌‌विटामीन बी8) (मिलीग्राम)
फोलेट (‌‌‌विटामीन बी9) (माईक्रोग्राम) 39.0
‌‌‌पाबा (‌‌‌विटामीन बी10) (माईक्रोग्राम)
‌‌‌टैरील-हेप्टा ग्लूटामिक एसीड (‌‌‌विटामीन बी11)
‌‌‌विटामीन बी12 (माईक्रोग्राम) 0.0
‌‌‌कोलिन (मिलीग्राम) 49.2
‌‌‌बिटेन (मिलीग्राम) 9.7
विटामिन ए (IU) 0.0
विटामिन सी (मिलीग्राम) 25.9
विटामिन ई (मिलीग्राम) 3.1
विटामिन के (माईक्रोग्राम) 13.4
खनिज तत्त्व  
‌‌‌कैल्शियम (मिलीग्राम) 183.0
‌‌‌कॉपर (मिलीग्राम) 0.6
जिंक (मिलीग्राम) 4.3
पोटाशियम (मिलीग्राम) 2525.0
फास्फोरस (मिलीग्राम) 268.0
‌‌‌मैंग्निज (मिलीग्राम) 7.8
मैग्नीशियम (मिलीग्राम) 193.0
लौह (मिलीग्राम) 41.4
सेलेनियम (माईक्रोग्राम) 4.5
सोडीयम (मिलीग्राम) 38.0
‌‌‌फलोराइड (माईक्रोग्राम)

औषधीय गुण:

‌‌‌अनिद्रा: – यदि आपको किसी भी कारण से नींद नहीं आ रही है, तो आपके लिए सबसे अच्छा घरेलू नुस्खा है, हल्दी वाला दूध। बस रात को भोजन के बाद सोने के आधे घंटे पहले हल्दी वाला दूध पीएं, और देखिए कमाल।

‌‌‌उदर रोग: – हल्दी वाले दूध का सेवन, आपकी आंतो को स्वस्थ रखकर पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करता है। पेट के अल्सर, डायरिया, अपच, कोलाइटिस एवं बवासीर जैसी समस्याओं में भी हल्दी वाला दूध फायदेमंद है।

कृमि: – 70 प्रतिशत बच्चों को कृमिरोग होता है परंतु माता-पिता को इस बात का पता नहीं होता। ताजी हल्दी का आधा से एक चम्मच रस प्रतिदिन बालकों को पिलाने से कृमिरोग दूर होता है।

कोढ़: – 5 – 50 ग्राम गोमूत्र में 3 से 5 ग्राम हल्दी मिलाकर पीने से कोढ़ में लाभ होता है।

गलतुण्डिका शोथ (Tonsilitis): – हल्दी के चूर्ण को शहद में मिलाकर टॉन्सिल्स के ऊपर लगाने से लाभ होता है।

‌‌‌चोट: – यदि किसी कारण से शरीर के बाहरी या अंदरूनी हिस्से में चोट लग जाए, तो हल्दी वाला दूध उसे जल्द से जल्द ठीक करने में बेहद लाभदायक है। क्योंकि यह अपने एंटी बैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुणों के कारण बैक्टीरिया को पनपने नहीं देता।

‌‌‌जोड़ों का रोग: – हल्दी वाले दूध का प्रतिदिन सेवन, गठिया- बाय, जकड़न को दूर करता है, साथ ही जोड़ों मांसपेशियों को लचीला बनाता है।

‌‌‌मधुमेह: – खून में शर्करा की मात्रा अधिक हो जाने पर हल्दी वाले दूध का सेवन मधुमेह को कम करने में मदद करता है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि अत्यधिक सेवन शुगर को अत्यधिक कम कर सकता है।

‌‌‌शारीरिक दर्द: – शरीर के दर्द में हल्दी वाला दूध आराम देता है।  हाथ पैर व शरीर के अन्य भागों में दर्द की शिकायत होने पर रात को सोने से पहले हल्दी वाले दूध का सेवन करें।

‌‌‌श्वास रोग: – हल्दी वाले दूध में मौजूद एंटी माइक्रो बैक्टीरियल गुण, दमा, ब्रोंकाइटिस, साइनस, फेफड़ों में जकड़न व कफ से राहत देने में सहायता करते हैं।  गर्म दूध के सेवन से शरीर में गर्मी का संचार होता है जिससे सांस की तकलीफ में आराम मिलता है।

‌‌‌संक्रमण: – मौसम में आए बदलाव एवं अन्य कारणों से होने वाले संक्रमण में हल्दी वाला दूध सबसे बेहतर उपाय है, जो आपको संक्रमण से बचाता है।

सर्दी-खाँसी: – सर्दी, जुकाम या कफ होने पर हल्दी वाले दूध का सेवन अत्यधिक लाभकारी साबित होता है। इससे सर्दी, जुकाम तो ठीक होता ही है, साथ ही गर्म दूध के सेवन से फेफड़ों में जमा हुआ कफ भी निकल जाता है। सर्दी के मौसम में इसका सेवन आपको स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है।हल्दी के टुकड़े को घी में सेंककर रात्रि को सोते समय मुँह में रखने से कफ, सर्दी और खाँसी में फायदा होता है। हल्दी के धुएँ का नस्य लेने से सर्दी और जुकाम में तुरन्त आराम मिलता है। अदरक एवं ताजी हल्दी के एक-एक चम्मच रस में शहद मिलाकर सुबह-शाम लेने से कफदोष से उत्पन्न सर्दी-खाँसी में लाभ होता है। भोजन में मीठे, भारी एवं तले हुए पदार्थ लेना बन्द कर दें।

‌‌‌सौंदर्यवर्द्धक: – (1). 2 चम्मच पीसी हुई हलदी, 2 चम्मच चन्दन का बुरादा, 2 चम्मच पीसे हुए हरे नीम के पत्ते को मिलाकर लेप तैयार करके चेहरे पर लगाएं। इससे चेहरा चमक जाएगा। इससे चेहरे के कील-मुहांसे, दाग-धब्बे ठीक हो जाएंगे। कुछ हफ्ते लगातार लगाने से चेहरे का रंग भी साफ हो जाता है। (2). ‌‌‌रात के समय 5 बादाम भिगो कर रख दें और सुबह छिलकर पीस लें। फिर इसमें 1 चम्मच हल्दी और 4 चम्मच दही मिलाकर अच्छी तरह मिला लें और चेहरे पर लगाएं। इससे चेहरा साफ हो जाएगा। (3). ‌‌‌चुटकी भर हल्दी, बेसन व सरसों का तेल मिलाकर लेप बनाएं। फिर इसमें थोड़ा सा पानी मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की सुन्दरता बढ़ती है।

‌‌‌हडि्डयों की मजबूती: – दूध में कैल्शियम होने के कारण यह हड्डियों को मजबूत बनाता है, और हल्दी के गुणों के कारण रोगप्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। इससे हड्डी संबंधित अन्य समस्याओं से छुटकारा मिलता है और ऑस्टियोपोरोसिस में कमी आती है।

 

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